3 अगस्त 2009
निराशा — ओह! भाड़ में जाए
आक्रामकता — दफा हो जाओ
निष्क्रियता — मुझे क्या
आदेश — खुद को देखो
अक्षमता — वह एक बेकार इंसान है
आलस्य — वह एक आलसी है
अज्ञानता — वह एक मूर्ख है
मुसीबत — मुझे लगता है मैं फंस गया हूँ
भ्रम — यह क्या बकवास है?
हताशा — फिर से सब खराब हो गया
दार्शनिक — किसे परवाह है?
विद्रोह — दुनिया भाड़ में जाए
परेशानी — मुझे परेशान मत करो
प्रोत्साहन — लगे रहो
शिष्टाचार — नमक पास करो
धोखा — बीमा एजेंट ने मुझे ठग लिया
कठिनाई — मुझे यह बकवास काम समझ नहीं आ रहा
पहचान — तुम कौन हो?
बदसूरती — तुम बहुत बदसूरत दिखते हो
सहमति — तुम बिल्कुल सही कह रहे हो
परोपकार — मुझे तुम्हारे एहसान की जरूरत नहीं है
टिप्पणियाँ
