यदि आपने कभी किसी पहाड़ की चोटी पर खड़े होने की इच्छा की है, जहाँ सांस लेना मुश्किल हो और हवा फेफड़ों पर दबाव डाले,
और पहाड़ी नदी को छूने पर बर्फीली ठंडक और शुद्धता से हाथ सुन्न हो जाएं,
जहाँ देवदार और सनोवर के पेड़ सिर के ऊपर ऊंचे उठते हों,
और हवा ऐसी हो कि सिर चकराने लगे...
...तो जरूर अल्ताई पर्वत की यात्रा करें...
आखिर पहाड़ों से बेहतर केवल पहाड़ ही हो सकते हैं...

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