अमेरिका ने मुझे कैसे बदल दिया? मैं यहाँ बस खुश हूँ। हर दिन मैं खुद से कई बार कहती हूँ कि मैं कितनी खुश हूँ!!!!!! मैं खुद से सवाल पूछती हूँ कि मुझे यहाँ ऐसा क्यों महसूस हो रहा है? मैं भगवान का शुक्रिया क्यों अदा करती हूँ और मुझे जवाब मिलता है कि यह आगे भी ऐसा ही रहेगा!!! अपने देश में, मैं इन भावनाओं के करीब केवल एक पल के लिए ही पहुँच पाती थी... मैं इस देश में बिताए हर पल को संजोती हूँ। मुझे यहाँ रहना, दौड़ना, घूमना, साँस लेना पसंद है, मैं यहाँ बस प्यार करती हूँ...... हर किसी से प्यार करती हूँ। अमेरिका में मैंने जानवरों से प्यार करना शुरू किया। पहले मुझे लगा कि मुझे बस मानवीय संपर्क की कमी है, लेकिन नहीं...... कारण कुछ और है!!!!! मुझे हाल ही में इसका एहसास हुआ! मैं बस सार्वभौमिक प्रेम के करीब आ गई हूँ, मैंने सार्वभौमिक सद्भाव के इस प्याले को छुआ है। मैं होना चाहती हूँ, जीना चाहती हूँ!!!!!! मैं सिर्फ अस्तित्व में नहीं रहना चाहती, मैं अपनी हर साँस को महसूस करना चाहती हूँ। मैं यहाँ अपनी आंतरिक आवाज़ सुनती हूँ!!!!!!!!! और मुझे यह सब खोने का डर है...... मुझे इस बात का सबसे ज्यादा डर है!!!! मैंने बच्चों को, फूलों को अलग नज़रिए से देखना शुरू किया है, मैंने अलग तरह से प्यार करना, देखना, साँस लेना शुरू किया है......... ये भावनाएं ऐसी हैं जैसे आपके सामने समुद्र हो, और आप चिल्लाते हुए उसमें दौड़ पड़ें, और आपको परवाह न हो कि आपने क्या पहना है, और आपको पता न हो कि पानी कैसा है!!!! आप खुशी की ओर दौड़ रहे हैं, आप प्यार के सार को छू रहे हैं...... मुझे नहीं पता कि मैं अमेरिका से प्यार क्यों करती हूँ। मैं बस प्यार करती हूँ।

